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क्या शादी करने के लिए सिर्फ बायो – डाटा काफी है ?

क्या शादी करने के लिए सिर्फ बायो – डाटा काफी है ?

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तक़रीबन एक दशक पहले वैश्विक तौर पर विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नज़र रखने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने एक सर्वे जारी किया था जिसमे ये कहा गया कि सिर्फ बायो – डाटा के आधार पर त्वरित शादी के बंधन में बंधने वाले 38 प्रतिशत जोड़े बेहद अल्पसमय में एक दूसरे का आकर्षक खोने की और चल पड़ते हैं और अंततः शादी टूटने के आलावा कोई चारा नहीं बचता। अब ज़रा गहनता से सोचिये कि ये सर्वे लगभग 10 साल पुराना है और प्रौद्योगिकी के जिस युग में हम जी रहे हैं वह ये आंकड़े अब तक निश्चित तौर पर कम हो जाने चाहिए थे लेकिन ऐसे हुआ नहीं।

हुआ यूँ कि यदि आज की ताज़ा स्थिति पर नज़र डालें तो 38 प्रतिशत का वो दस साल पुराना आंकड़ा दूसरी मंज़िल पर पहुँच चुका है और यदि वक़्त रहते इन आंकड़ों पर गौर नहीं फ़रमाया गया तो स्थिति सच में भयावह होगी। इन आकंड़ों को देखकर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ऐसी स्थिति के पीछे मूल कारण क्या रहे होंगे ? क्या व्यस्त लाइफस्टाइल के चलते ऐसा हुआ ? या रिश्तों की अहमियत खोने लगी ? या फिर इसका बोझ भी गिरती अर्थव्यवस्था पर डाल दीजिये।

खैर, असली कारकों की तरफ देखेंगे तो पाएंगे कि कारण इमोशनल हैं। विज्ञान की जांची पारखी थ्योरी कहती है कि किसी भी व्यक्ति से आप तब तक अपना जुड़ाव नहीं महसूस कर सकते जब तक आप उसे समझ और प्रेम के पैमाने पर नाप नहीं लेते। ऐसे में बस एक बायो – डाटा देखकर शादी को हाँ कह देना और शादी कर लेने के बीच में समझ और प्रेम दोनों के लिए ना तो प्रयास किया जाता है और ना ही वक़्त तामील होता है। अब ज़रा सोचिये इतने साधन संपन्न होने के बावजूद हम जीवन की इस मूलभूत जरुरत को इतना कमतर क्यों आंकते हैं ?

और ये जाना की वाजिब होगा कि ऐसे आंकड़ों और कमतर आंके जाने के बावजूद वैश्विक वैवाहिकी उद्योग ऑनलाइन होने वाले सम्पूर्ण उद्योग का लगभग तीसरा हिस्सा अर्पित करता है। ऐसे में क्यूंकि जरुरत थी इसलय उद्योग बढ़ता गया लेकिन इस उद्योग से होने वाली हानि की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया और चूँकि विवाह बेहद चकाचौंध वाला विषय माना जाता है इसलिए मूलभूत जरूरतों को अंधेरों में रखा गया।

घर के पंडित जी से लेकर विविध मैरिज ब्यूरो और ना जाने कितनी ऑनलाइन शादी की वेबसाइट स्थापित हुई परन्तु सब के सब बायो -डाटा को आधार बना कर लोगो को मिलवाने और रिश्ते पक्के कराने का काम करते रहे और ये सब इतना जल्दी जल्दी होता है की शादी करने वाले दो लोगो को एक दूसरे को जानने का मौका तो दूर की बात है शायद भरपूर बात करने का मौका भी ना मिले और फिर जब शादी के बाद ये मौका आता है तब तक वो 38 प्रतिशत वाले आंकड़ों में इजाफा होना शुरू हो चूका होता है।

ऐसे में जिनको शादी करनी है उनके लिए या फिर यूँ कहें कि सिर्फ उन जोड़ों के लिए क्या कुछ ऐसा नहीं किया जाना चाहिए जिनसे उनकी आपसी समझ और प्रेम को बढ़ावा मिले ? जिससे उनके रिश्ते शुरू होने से पहले ही इतने मज़बूत हो जाए कि निराशा के इन आंकड़ों में जाने की जरुरत ही ना पड़े। क्यूंकि आज नहीं तो कल ऐसे प्रयास बड़े और वैश्विक स्तर पर शुरू करने ही पड़ेंगे। बहरहाल इतने बड़े विवाह उद्योग के बीच में से एक छोटी सी उम्मीद जरूर दिखाई पड़ती है।

एक रिक्रूटमेंट सलाहकार है जयपुर से, सुरेश नायर। शायद रिश्तों की अहमियत को बेहद अच्छे से समझते हैं इसीलिए समझ और प्रेम के दायरों को बढ़ाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे रहे हैं WWW.DILKERISHTE.COM के रूप में। बायो -डाटा से एक कदम आगे बढ़ती हुई इनकी पहल दुनिया की पहली ऐसी पहल है जहा लोग अपना वीडियो बनाकर एक दूसरे को बेहतर समझ के साथ चुन सकते हैं और अपने समझ के दायरों को भी बढ़ा सकते हैं। वीडियो प्रणाली में पहले से लिप्त इस जनरेशन के लिए सोशल मीडिया से इतर ये निःसदेह एक बेहतर टूल साबित होगा अपने जीवन के लिए बेहतर फैसले ले पाने को।

खैर नायर साहब को बधाई देने के साथ ही ये सवाल भी पैदा होता है कि ये प्रयास युद्धस्तर पर कैसे हो और सम्पूर्ण विश्व तक कैसे पहुंचा जाए। साथ ही साथ लोगो को भी ये आदत डालनी चाहिए की जिस माहौल में वे जी रहे हैं , ऐसे माहौल में एक बेहतर साथी की उम्मीद सिर्फ समझदारी , प्रेम और शायद अब वीडियो के द्वारा ही पूरी हो सकती है।

किसी महान दार्शनिक ने एक बार कहा था कि शादी और नौकरी बेहतर जीवन का आधार है और उम्मीद है कि आने वाले समय में ये आधार और मजबूत होंगे और सिर्फ बायो डाटा मात्रा से विवाह करने की बजाय लोग और समझदारी से वीडियो – बायो डाटा की तरफ बढ़ेंगे और बेहतर फैसले लेंगे।

वीडियो – बायो डाटा के आंकड़े एक दशक के बाद कैसे होंगे इसका अंदाजा तो नहीं लगाया जा सकता लेकिन हाँ 38 प्रतिशत से बेहद कम होंगे ये तय नज़र आता है।

Post Comments (3)

Dharmendra 09 Sep, 2020 06:58, AM

Sir hum aapke en vicharo se sahmat h very nice vichar h aapke


Dharmendra 09 Sep, 2020 06:54, AM

Right


Aarush 07 Nov, 2019 13:00, PM

Great Concept.


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